Rainy season

टिप टिप नहीं बरसा पानी, आकाश में नजरें गडाए. बुंदेलखंड मे सूखा पडा है,
भूजल स्तर गिरता जाए,
भू खनन के कारण
पहाड़, बादल न रोक पाएं।
पहले इतना बरसता था पानी
कि नाली नदी बन जाए।
मिट्टी को पॉलीथीन से पाटा,
कि बडे पेड़ भी न उगने पाए।
फिर कहें, सरकार है दोषी, 

बुंदेलखंड में कुछ न कराए।
पॉलीथीन खिलाते गायों को, 

 खाकर गाएँ भी मरती जाएं।
अपनी गलती न दिखे किसी को, 

बस आंख बचाकर सडक पर, पॉलीथीन का ढेर लगाएं।
रीना करे लाख कोशिश
बिना सुधरे कैसे पानी ले
आएं।


आत्मनिर्भरता

जब कोई नौकरी पाता है। 

प-ति व पिता का सहयोग भूल जाता है। अविवाहित के लिए मां बाप और विवाह के बाद प-ति का सहयोग आवश्यक हो जाता है।कुछ ऐसी भी हैं जो बेवकूफ़ बनाई जाती हैं।शादी के बाद पढाई पूरी करने का सपना दिखा कर।जो फिर कभी पूरा नहीं होता है।इसलिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। कोई काम छोटा या बड़ा नहीँ है पर पिछले अर्धशतक के पुरूष ऐसे ही है ं।अपनी हुकूमत चलंने के लिए स्त्री को बेवकूफ़ बनाने वाले हैं।पहले जॉब फिर, शादी।आज वही पू

कृष्ण

जब धरती का कार्य सुचारु रूप से चलने लगा। योग द्वारा कुछ ने सिद्धि प्राप्त की।
इससे उनमें अहंकार की भावना जाग्रत हुई व हुकूमत के लिए एडी चोटी का जोर लगा दिया।
आहत जनता ने घबराकर उनकी पूजा प्रारम्भ कर दी।तभी,
माटी में खेलते एक नन्हे बालक नेअपनी बाल सुलभ हरकतों से जनता कि ध्यान खींचा।
जिसकी असली मां जेल में थी।
पर फिर भी उसने धरती माता की गोद में व गऊ माता व यशोदा मां के दूध व संरक्षण में जो बल प्राप्त किया वो पूतना जैसे जहरबुझे लोगों को यमलोक पहुँचाने व जहर से अपनी रक्षा करने के लिए काफ़ी था।
बस तब से कृष्ण नाम जहररोधी हो गया व रीना के बल व सफलता का
पर्याय बन गया।
सही लगे तो अवश्य शेयर करें।

बरसात

सागर से उठकर बादल आते, गड़गड़ गड़गड़ शोर मचाते।
आसमान में करें अंधेरा।
पानी बरसे, आस जगाते।
एक पवन का चलता झोंका,
दूर देश को सब उड़ जाते।
रीना के घर बड़ा बगीचा।
पक्षी प्यासे ही रह जाते।

एक गलती चिढने की

एक बड़ा देश, बहुत बड़ा। इतना कि उससकी सीमाएं समुद्र में खुलतीं थीं।पर उस देश का हर निवासी, केवल एक ही इच्छा रखता था। वो अपने, पडोसियों को नीचा दिखाने का यत्न करता रहता था।अपना घर बड़ा सा बनाकर नौकर रखना हरेक का शगल था।हरेक अपने क्षेत्र का राजा।।समुद्र पारकर बाहरी लोगों ने किनारे रहने वालों को तरहतरह के सामान व रत्न देकर फुसलाया।समुद्र तो वहाँ भी थे, रत्न भी थे, पर उन उपहारों ने उसको भरमाया।
धीरे-धीरे उसने पैर जमाए।उसको उखाड़ फेंका और स्वयं वहाँ का बादशाह बन गया।

अपने आने के लिए मार्ग की पहचान बनाई। जो गेटवे औफ इंडिया कहलाई।
फिर भी उसको समझ न आया।अपने को राजा कह,
पडोसी को अपनी सेना से डराया, धमकाया।
आपस की लडाई में, बाहरी ने पैर जमाया।
उसके घर में, उसी को गुलाम बनाया।
उसको नौकर बना कोड़ा लहराया।
पर वो फिर भी समझ न पाया।
जब आजादी समीप थी, कुछ ने फिर कुचक्र चलाया।
गाय की चर्बी का भ्रम फैलाया।
और अहिंसा का चक्कर चलाया।
और नाम बदल सबकुछ पाया।
सब भूल गए, कर्म करना है,
मोहरा नहीं बनना है।इतिहास जानते हुए भी, किसी ने इतिहास नहीं खंगाला। नेताओं की जीहुजूरी में जीवन बिता डाला।
रैलियां निकालीं, पिट ते रहे।
मरते रहे।
नेता राज करते रहे, कुर्सी पर बैठे चैन की रोटी खाते रहे।
रैलियों में मरने लोग जाते रहे।
क्या कभी किसी ने सोचा,
कि जहां हर पडोसी दूसरे से चिढेगा वहां दुश्मन राज करें गे।
अगर अच्छा होगा कि वह यह न देखे कि उसके पास क्या है? 

यह देखे कि… 
देश है तभी हम हैँ। उसके लिए पढकर फैक्टरी लगाएं।

 कृपया शेयर करें। 


देश प्रेम

आज बस देशप्रेम चाहिए। जैसेप्रेम जरुरी है जीने के लिए,
उसी प्रकार देश प्रेम भी जरूरी है जीने के लिए।
आज देशसे प्रेम कोई नहीं करता, केवल धन से ही घर को है भरता. कभी सोचा है कि क्या होगा,? अगर देश से की गद्दारी,
तो क्या कोई ऐसा देश होगा?
जो गद्दार को रख ले?
जो नहीँ हुआ अपने देश का,
क्या वो दूसरे देश को भरोसेमंद लगेगा?
सब धन हो जाएगा जब्त?
क्या रह जाएगा तब?
तब कहां जाएँगै सब?
चीन हमारा दुश्मन है।भारतीय सीमाओं में सेंध लगाता है।
भारतीयों को मरवाने के लिए, पडोसी दुश्मन से हाथ मिलाता है।अगर नहीं खरीदोचायनीज सामान,
तो उसका बाजार ध्वस्त हो जाएगा, फिर
वो तुम्हारे घर कैसे मारने आएगा?
उसके पास सैनिकों को पालने को धन ही नहीं होगा।
वह बिना युद्ध ही जमींदोज हो जाएगा।
क्या कभी तुमने अपना भ-विष्य सोचा है?
ये वो दुश्मन देश हैं,
जो अपने नागरिक को भी एक से ज्यादा बच्चे पैदाकरने पर मौत व देश निकाला के फरमान जारी करते हैं, क्या वो किसी विदेशी को रख पाएंगे?
अब तो समझ जाओ,
हमसे देश नहीं, देश से हम हैं।

कृपया शेयर करें।