IMP-7 :

© [Reena Kulshreshtha] and [glimpseandmuchmore.wordpress. com], [2017].

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Imp-8,  Friend NEIGHBOUR:

ये मेरे पडोसी का घर है।

ये एक दर्जी हैं। हम यहीं कपड़े बनवाते हैं। ऊपर विकी लंच कर रहा है।उसकी दादी मां कहती हैं, उसकी सास की सास भी यहीं आईं थीं शादी कर।ये इनकी सभ्यता है। ये घर की खाली जमीन पर गेंहू उगाते हैं , जो सालभर चलता है।
आम, अमरुद, जामुन, शरीफा, केला, कटहल, मैथी, सोया पालक, सहजन, ईंधन की लकडी के पेड सब घर में ही उगाते हैं । पानी के लिए एक पानी खींचने वाला यंत्र है। ज्यादा से ज्यादा 100/150फुट जमीन होगी।
ये परंपरागत रसोईघर है,इनका कहना है कि पहले यहां जंगल था। 

हम इस द तिया मार्ग से पहले जाते थे तब भी जंगल था। ये जंगल में रहते थे रहते थे।करीब 150 /200सालों से इनका कुटुम्ब यहीं है।ये मिट्टी के बरतन में चूल्हे पर भोजन पकाते हैं। गैस है पर ये पसंद नहीं करते। कहते हैं, इसका आनंद ही कुछ और ही है।

मेरा खयाल है, अगर सब इसी तरह घर बनाएं तो क्या सुख नहीं है? 

क्या घर को अजायबघर की तरह, बनाकर बीमारी पालकर,नौकरों की फौज रखकर,कोई काम न करना, किटटी, व ऊंचा शो करनाही
सुख है क्या ?

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colour of happiness:

कल ZeeNews मैथ्यू रेगार्ड ने बताया कि पीला रंग प्रसन्न रहने का मूल मंत्र है।तभी कृष्ण पीताम्बर पहनते हैं।ये मेरा खयाल ़हैं  कि कभी किसी ने पीले रंग पर खोज नहीं की।

पैसा:-

क्या बस यही जीवन है?
क्या आज जीवन के मायने बदल गये हैं?
क्या अब अपनों के मायने बदल गये हैं?
सब बाहर जाते ही क्यों हैं?
क्या अपनों के साथ रहकर जीवन बिताया नहीं जा सकता है?
क्या कभी सोचा है कि जब
भारतीयों को बाहर से भगाया जाता हैतब ,
क्या होता है?
क्या अपने शहर में विदे शी कंपनी में काम कर सामान बनाया नहीं जा सकता है?
फिर क्या ऐसा काम करना चाहिए?
क्या आज घर के यही मायने हैं,
खाली घर,
क्या फायदा ऐसा घर बनाने का, जहाँ बच्चे आना ही पसंद न करे?
क्या घर रहकर दूसरे तरह के जॉब नहीं किए जा सकते हैं?
आखिर क्या हुआ,
सब नोट कागज का रद्दी का ढेर बन गया।
बाहर से जमा धन हो, चाहे यहॉं, कितने ही हर हफ्ते ,
विदेश जाने वालों के घर से नौकरों की फौज हटकर एक नौकर पर आ गयी।
बाहर से आने को आ तो गये,पर आने के खर्चके अलावा क
कुछ ला नहीं सके। कहीं
भी देख लें, हर देश में नोट बंदी होती है।
वैनेजुएला ही देख लें।
वहाँ तो नये नोट भी नहीं हैं, यहॉं नये तो आ गये।
बाहर क्या भारतीयों की हालत अच्छी है?
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S-173

Lonliness:-

आज जीवन बहुत शानदार है। वातानुकूल माहौल , कार, और पैसा भरमार है।पर कभी सोचासबसे ज्यादा अकेलेपन की भरमार है।किटी होतीं हैं,अनजान चेहरे अपना तबका ऊंचा दिखा ते हैं।

पैसे के नाम पर गरीब की खिल्ली उडाते हैं।

<सामानों से घर को अजायबघर बनाते हैँ।
किस केघर कितनी बड़ी फौज है नौकर की बताते हैं।
काम हाथ से करने में बेइज्जती महसूस कराते हैं।
नौकरों के भाव बढाते हैं।
पडने पर डकैती,
होश उड जाते हैं।
पर घर का काम करने में बेइज्जती दिखा ते हैं।
दुधमुहों को आया के पास कि. गा. छोड किटी जाते हैं।
जब ये ही बड़े होकर
उन्हें आश्रम छोड आते हैं।
तो बच्चों को बुरा कहते हैं।
फिर अकेलेपन ….

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NORTH INDIANDISH:-1

  1. 1/2 kg गुड़, मेवा काजू, मखाने किश िम श, छुहारे, बादाम 1ली देशी घी, इलायची चूर्ण ,।
  2. पहले हर मेवा को अलग अलग घी में तल लें। 
  3. फिर 2 ब डा़चमचा घी में धीमीधीमी आंच पर गुड़ मैल्ट कर लें।
  4. फिर पिसी इलायची
    मेवा मिलाएं व चलाएं। 
  5. फिर एक बड़े थाल में घी
    लगाकर इसको उस पर
    पलट दें।

  6.  एक दिन ठंडा होने के लिए बाहर ही रखें। 
  7. चाकू से काटकर खाएं।