गोबर से निर्मित

कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर,सबको बताया कि अगर बरसात बहुत तेज हो तो वहां से दूर किसी मजबूत व सुरक्षित

स्थान पर जाएं।और पर्वत की पूजा इसलिए करवाई कि उसी से हमें अन्न व भोजन मिलता है।

उसपर ऊंचाई पर लगे बड़े बड़े पेड़ बादलों को रोकते हैं, व उनसे टकराकर पानी बरसता है, उसपर उगने वाली घास से

गाय को चारा मिलता है, तो वह दूध देती है,, जिसमें वसा बहुत कम होती है व शरीर स्वस्थ होता है।

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