Modern ladies and girls:-


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आज‌की महिलाएं व लड़कियां:-
वैसे तो सब महिलाएं कहती हैं,घर के बाहर झाड़् मत रखो॰पैर मत लगाओ,,,,
पर खुद क्यो नहीं मानतीं कि मांग भरो,चूडी़ पहनो,बिंदी लगाओ ।
*इसके लिए अपशगुन कर सकती हैं जो कि सुहाग की निशानी है,वैसे दिन भर उपदेश।
तभी तो इतने अपशगुन हो रहे हैं,वो ये कि
*आदमी या लड़कों के साथ घूमने वाली लड़कियों को आदमी आवारा समझता व छेड़ता है कि जब औरों के साथ घूम रही है तो मेरे साथ भी क्या परेशानी है?
*मांग,चूडी़ बिंदी एक सुरक्षा कवच हैं,
जिससे कोई आंख उठा कर देखने की हिम्मत न करे।
*आदमी की नहीं धन की चिंता है।
कि
*आज पूरा वातावरण कितना शांत है।
*जहां‌ देखो कोई प्रदूषण नहीं।
*सबको मालूम हो जाना चाहिए कि कम पैसे से जिंदगी चल सकती है ,पर बिना प्रकृति के नहीं।
*प्रकृति,जो हमें जीवित रहने के लिऐ भोजन देती है व पीने को जल।
*आज तकउस मां की दम घुट रही थी।
*जब कम में गुजारा हो जाता है तो पैसे की हाय हाय क्यों?
*ये सब आज की लड़कियां, जो घर के काम नहीं करना चाहती हैं,
*न करती हैं,
*सोचती हैं कि उनकी मां या उनके पति की घर के काम करें।
*सबकी अकल अब कोरोना ठिकाने लगा देगा।
*कोरोना के फैलने का सबसे बड़ा कारण,लापरवाही है व गंदगी है
*बिना फ्रैश हुए आधुनिकता के नाम पर चाय व नाश्ता करना।।
*सुबह पराठे व साग की जगह ब्रैड पास्ता,मैगी खाना व बच्चों को भी खिलाना।
*,बच्चों को क्रेच में छोड़ना या मां पर अहसान दिखाया या नौकर के पास रखना ।
*ताजे साग *दही की जगह, सालों से या महीनों से पालीथीन में पैक वस्तु खाना व खिलाना।
*कभी झाड़ू पोंछा न करना व
न लगाना,
*नौकर तो ए
*जानवर भी जहां बैठता है,पूंछ से जगह झाड़ लेता है।
*शाम को घर में घुसते ही चीखना कि घर गंदा पड़ा है।
*बिना हाथ धोये खाना।
*बच्चों को बोझ समझना।
फिर अहसान दिखाना कि हम थककर आ रहे हैं,कोई चाय भी नहीं पिला सकता है?
*हर वक्त बेहूदे कपडे़ पहनना ।
भॉरतीय परम्परा का अपमान कर अंग्रेज़ी में बात‌ करना।
*हर वक्त‌ विदेश की नौकरी को महत्व देना,ये विचारधारा लड़कों की नहीं,भारत की लड़कियों की है।
*इसके कारण आज देश का युवा वर्ग राह भटकरहा है।
*बाहर (हर देश में) हो रहे अत्याचार को,हर चैनैल व मीडिया को ज्यादा से ज्यादा दिखाने की जरूरत‌है।

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