नाद (कोरोना का इलाज):-

*नाद:-
*महाभारत के युद्ध में, श्री कृष्ण ने पंचजन्य शंख का नाद इसीलिए किया था कि कमजोर दिल लोग ऐसे ही मर जाएं।
*माँ काली भी जब युद्ध के लिए प्रस्थान करती थीं तो युद्ध की प्रारम्भ शंख,नगाडोॱको बजाकर करती थीं।
*भोलेनाथ भी तांडव के समय डमरू बजाते हैं।
*नाद से कमतरंगें व कम्पन होता है,जिससे वाचावरण में एकत्र नकारात्मक ऊर्जा नष्ट‌ हो जाती है।
*अत: समस्त संसार के लोग जागरुक हों व रोज कर्फ्यू से हालात रखें।
*व संध्यावंदन के समय उच्चतम स्वर मेंनाद‌ करें।
*क्योंकि सूर्य की धूप सबसे बडा़ सैनैटाइज़र है ,पर वह भी सूरज डूबने पर नहीं मिलेगी,अत: जितने समय धूप आये,बंद कांच की खिड़कियों से पर्दे हटाकर धूप आने दें व रोज घर को
विषाणु ‌रहित करें व शाम को ताली या थाली बजाकर ,ध्वनि तरंगों से कोरोना को नष्ट करें।
**यह मैसेज समस्त संसार में जल्द ही प्रसारित करें व एक माह तक रोज‌यही करें व कोरोना को महामारी न बनने दें।
*जिसप्रकार बर्फ गिरने पर भगवान शंकर ,विष्णु,मां काली सब अपनी अपनी गुफाओं से बाहर नहीं निकलते हैं।
*ये दोनों तरीके पूरे संसार को अपनाना होगा व महामारी ‌को फैलने से रोकना होगा।
**इसे अधिकतम लोगों तक‌ पहुंचाएं।
*आहारवेद ।

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