**माँ काली:-

*माॅं‌ काली:-
*रक्तबीज नामक असुर को मारने के लिए,ऐसा व्यक्ति चाहिए था,जोउसका रक्त जमीन पर न गिरने दे।
उसकी हर बूंद से एक रक्त बीज बन जाता था।
*शिव की शादी के लिए, पार्वती को नारद ने समझाया।
“उन्होंने हर मौसम में मौसमके अनुसार तपस्या करके ,शिव को प्रसन्न किया।
*पर वो काली हो गईं थी,अत: कासी कहलायीं।
*उन्होंने जब रक्तबीज का संहार किया,तब उसका सारा रक्त जीभ से पी लिया।
*जब तक उसके रक्त की आखिरी बूंद तक खत्म नहीं हो गई,तबतक वह संहार करती रहीं।
*फिर वह अपना असली स्वरूप भूल गईं।
*अब वह शांत नहीं हो रहीं थीं।
*सब प्रार्थना करके थक गये,पर उनका क्रोध शांत नहीं हुआ।
*जब शिवजी उनके सामने लेट गये,तब उनका पैर शिव जी पर पड़ा,तो नीचे देखा।
*शिव जी को देखकर उन्हें अपना असली स्वरूप याद आ गया।
*शिव जी ने उन्हें याद दिलाया,तुम मेरी पत्नी गौरी हो।
*गौरी तो बहुत ही शांत स्वभाव की है। वो खून नहीं पीती है।
“मां काली कभी भी खून नहीं मांगती है।
*वो एक शांत मां का वह रौद्र रूप हैं,जिसका देवताओं ने अपने फायदे के लिए दुरुपयोग किया।

  • मां सबका दुख दूर करने वाली हैं।
    *आहारवेद।

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