कृष्ण नीति

विश्व के हर कार्य को अपनी ताकत से,
ध्यान योग के माध्यम से करने व परिवर्तित करने की समस्त क्षमता के साथ ही जीवनमरण को भी,
अपने वश में करने से,
वो विश्व के अंश, अणु, परमअणु में व्याप्त होने के
कारण विष्णु हुए।

जब विष्णु ने अवतार लिए,
अगर उन्हें क्रम से रखा जाए तो
जंतु विज्ञान का वर्गीकरण और उसके

फाइलम आते हैँऔर सारी योनि यां, सारी स्पशीज़ हैं।
और ये सब अवतार, समस्त कशेरुकी हैं।
पुराण का अर्थ,
केवल विज्ञान है।

विज्ञान को पढ़नेवाले

भी चाहिए।

अर्थ शास्त्र का अर्थ वह विज्ञान जिसमें किस तरह व्यापार करें व अर्थ (धन लगाएं। ) बताया जाता है।

पर
बिना पढे पास करने वाले नियम के कारण आज कोई भी कुछ नहीं कमा सकता है, क्योंकि जब कुछ पूछा जाता है तो

काला अक्षर भैंस बराबर

नजर आता है।

बाकी कसर आरक्षण ने पूरी कर दी है।

जिससे अनाड़ी को पदासीन कर पढे लिखे को भटकाते हैं।
आज भारतीय यांत्रिकी संस्था न
मे केवल आरक्षण से ही अधिकतर बच्चे जाते हैँ। 

 

दिल्ली विश्व विद्यालय का परिणाम भी 6अंक होने से अन्य जातियों के लिए कट अॉफ0रखा गया।0पर भी प्रवेश मिलने पर औ र

0नं पर छात्रवृत्ति मिलने से कौन पढना चाहेगा? पढेंगे नहीं तो रिसर्च कौन करेगा?…. 

आरक्षण से पास इंसान से क्या कोई इलाज करवाकर क्या मरना चाहेगा? 

फिर तो अगर छींक भी आई तो विदेश जाना पढेगा।
आरक्षण से पास इंसान क्या कोई खोज कर पाएगा
या किसी नक्शे को बना पाएगा?

फिर तो हर चीज के लिए विदेश ही जाना पडेगा।

अब विदेश, कोई बगल में तो है नहीं।
क्या जरूरी है कि आरक्षण
से डॉक्टर या इंजीनियर ही बना जाए।
ये देश सबका है, सेना में जाएं,खेती करें, इतना धन न कमाएं कि कल औलाद नौकर के साथ रहकर,
को बाप समझने लगे।
देश की रक्षा आपकी रक्षा है। 

श्रीकृष्ण की यही नीति है कि
जो भी करना या सीखना है,
अपने
आसपास के वातावरण से सीखो और महारत हासिल करो।
कृष्ण ने सब अपने आसपास के माहौल और अपने गाय चराने जाने के दौरान सीखा।
उनका प्रारम्भिक जीवन जंगल में गउ चराने में बीता।
वो आज से5250साल पहले आए। वो मार्शल आर्ट के जनक हैं।
आज की पीढ़ी विदेशी वैज्ञानिकों का नाम लेकर बडे गर्व से लेती है।
जादूगर डायनैमो का भी।
अपने हिंदू गुरुओं का नाम इसीलिए नहीं लेती, क्योंकि उन्हें बताया ही नहीं गया।
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2 thoughts on “कृष्ण नीति”

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