बूढ़ों के शहर

आज देश का युवा वर्ग, छोटे शहरों से बड़े व दूर के शहरों की तरफ पलायन कर रहा है।ये सब माता पिता के एकल कुटुम्ब का प्रभाव है। पहले सब मिलकर साथ-साथ रहते थे।अब एक ही बेटा-बेटी। बच्चों को दादी बाबा के स्थान पर आया व नौकरों का संरक्षण मिलता है। करोड़ पति मांबाप को बेटे से मिलने के लिए
अलग घर हो, क्योंकि बहुओं को सासससुर का उसी घर में आना पसंद नहीं, 

जिसे उसने अपने खून पसीने ससे सींचा व बेटे को पढाकर इस काबिल बनाया कि वह एकछत्र कार्य कर सके। 
मां बाप के साथ कम समय व नौकरों के साथ पूरा। वही आदत मांबाप को पराया बनाकर दूर कर देती है। फिर वह होटल में रहे, या घर। सब जगह नौकर के हाथ का ही भोजन।
फिर घर में बंदिशें।
इससे आज की युवा पीढ़ी अपने मांबाप के नक्शे कदम पर चलती है।
आज आप चाहकर भी वापस नहीं ला सकते, क्योंकि आपने केवल अपना व अपने मांबाप का स्वार्थ देखा है।
शेयर जरूर करें। ये उद्गार हमने बच्चों से ही सुने हैं। /b>


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