बुढापा

अगर कोई अकड़ू भी हो व झगड़ालू भी, तो बुढापा बहुत बुरी तरह कटता है।
अगर कोई सीधा, तो भी।
ये मानव जीवन की वो वास्तविकता है जो नर्क से भी बदतर है।
अगर बुढापा अच्छा काटना है तो व्यवहार सही रखना व शरीर का चलते रहना जरूरी है।शरीर पालन के लिए, भोजन अच्छा हो न ज्यादा नमकीन , न ज्यादा मीठा।फल और सब्जी ज्यादा। वो भी मुलायम व कडे हर तरह के।खाना उपयुक्त, ये नहीं कि बीस बीस रोटी एक समय में खा रहे हैं। जिससे बुढापे में कम खाना खाने पर कमजोरी न आए।
दूध भी कई बार थोडाथोडा। अपने को वातावरण के अनुकूल
बनाएं।कोशिश करें कि
हर कार्य स्वयं करें।जमीन पर रुई का गद्दा बिछाकर सोएं।
जिससे जोड जाम न हों।
जमीन पर बैठकर ही भोजन करें।जिससे आहार नाल सीधी रहे व तोंद भी न निकले।
चींटे की तरह मीठा न खाएं।गुड़ व शहद रोज अवश्य खाएं।
जब खाली बैठें तो सोएं नहीं। नींद तभी लें जब थक जाएं, वरना बुढापा बहुत कष्टकारी होता है।
लोग आजकल काम नहीं करते, नौकर रखते हैं। बुढापा कैसे गुजरेगा? कभी सोचा है। पैसे की अकड़ से घरके सदस्य भी दूर हो जाते हैं। ऐसे लोगों के घरों में वफादार नौकर कांड कर जाते हैं। जिस शरीर की इतनी देखभाल कि कार्यो को नौकर करे।फिर पुलिस, व…
संभल जाएं। जो अकड़ दिखा दिखा करबूढे हो गए, अकडी चीज तो टूटती ही है।रिटायरमेंट के बाद बुढापा बडा कठिन है।  इसलिए काम करते रहें। वरना आदमी की दिनचर्या एकदम बदल जाती है, तो कुछ दिन तो चल जाता है, फिर नींद गायब, क्योंकि काम नहीं तो थकान नहीं। फिर वो रात भर जगता है, तो सब उसे पागल कहने लगते हैं।
बाकी तो कर्म फल मिलेंगे ही।
कृपया शेयय करें।


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One thought on “बुढापा”

  1. बिल्कुल सही लिखा आपने।जवानी स्वर्ग और बुढापा नर्क के समान है।

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