कान्हा

कब से पुकारूं तुझको कान्हा, अब तो जीवन संवार।आन पडी मैं तेरे द्वार।
मैं कोई मीरा, राधा नहीं , अपना समझ के संवार।
कोई तो दे दे खुशहाल राह,। अब तो सुन ले पुकार। पकड़ के बांहें राह पे
ला, अब तो जीवन संवार।
ओ मेरे भगवन, हर लो हर उलझन,
तुम्हरे बिन हम, और किसको पुकारें।ओ पालनहारे,
कान्हा हमारे,
कान्हा सब तुझ पे छोड,खुशहाल जीवन गुजारें।
 

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