जरूरत

प्र-उससे पूछा, क्या तुम्हारे घ र में कोईनहीं कहता या विरोध नहीं करता है कि तुम इन्हे मुफ्त
क्यों पढा रही हो?
क्या अभी भी बच्चे पढने आते हैं? उ- प्यासा तो पानी को ढूंढ ही लेता है।

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3 thoughts on “जरूरत”

      1. चाणक्य का अपमान न होता तो शायद वो देश का भविष्य बदलने की कोशिश न करते। खैर चाणक्य तो बहुत हीबडी हस्ती हैं। उनकी तुलना किसी से नहीं हो सकती है

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