अनजान रक्षक

कभी कुछ ऐसा हो जाता है कि लगता है कोई हमारा ध्यान रखता है। जिसे हम राम कहते हैं। कोई अनजानी ताकत जैसे कहीं हर वक्त हमें देखती है। सन2000की घटना है। 
एक बार मेरी एक मित्र अमृतसर परिवार के साथ घूमने गयी।बस से उतरते समय एक शख्स जबरदस्ती आगे आकर, कि लाइए बच्चा हमें दे दे और आप उतर जाइए, कहनेलगा।पति व बच्चों के उतरने के बाद , दूसरा सामान उठाकर आटो में रखने लगा। मनाकरने पर भी नहीं माना। वो बच्चों को लेकर दूसरी तरफ गयी। वहाँ एक अनजान शख्स बारबार उसके बगल से बुदबुदाते निकलने लगा। आखिर में मेरी दोस्त ने सारा सामान अॉटो से उतार दिया।हुआ  ये कि और आटो वालों से तय किया, पर सब ज्यादा पैसा मांग रहे थे। मेरी दोस्त ने 

सामान उतार लिया। उसके पति गुस्सा होने लगे।और बोले इसमें नहीं जाओगी तो अब मैं आटो नहीं कर रहा हूं। ये सुनकर,  अॉटो वाला भी बारबार कह रहा था,  कि अब कोई अॉटो वाला नहीं आएगा। सबको बडबडाते छोड बच्चों कै साथ सामान धीरेधीरे सरकाया व दूसरे स्थान पर खडे हो गये। पर वो अॉटो वाला नहीं गया। दो घंटे बाद एक अॉटो प्रकट हुआ। उसे देखकर आगे बढने जा रहा था।बच्चों से कहते हुए कि इस अॉटो में चलना है फौरन सामान लेकर दौडो और उसे दौडकर रोककर उसमें सामान रखा व बैठकर पति व बच्चों को भी बुला लिया।
अब पति तो लगे चिल्लाने कि मैंने पूछा नहीं कि कितने में चलेगा।
और बिना पूछे बैठ गयी।
खैर जब आटो चलने लगा तो उस आटो वाले को बताया
कि वो जो वहाँ आटो खडा है वो बहुत कम पैसे में तैयार है।तो उसने भी वही कहा, जो उस शख्स ने कहा था, ये आगे जाकर गला काटता है। तब उसने भी अपने पति को वही बताया। तब पति के तो होश ही उड़ गये।घरवालों को चुप रहना व समझना भी जरूरी है।पता नहीं वो कौन था जिससेभगवान् ने मददगार
बनाकर मदद की।बस वो शायद नया जन्म ही था।

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