संवेदनहीनता

आज हर इंसान अपने को महान दिखाना चाहता है।
।इस
के लिए वो कुछ भी करने को तैयार है।
पुराने समय में भी यही था।
पर जब अति हो जाती हैतो,
युग खत्म हो जाता है।
आज पुनः वही हालात हो रहे हैं।
जनता उदासीन है।
देश में, शहर में, सीमा पर गांव में , क्या हो रहा है,?
किसी को कोई मतलब नहीं। कहती है,
जो हो रहा है कानपुर, दिल्ली , आगरा, कोलकाता, लखनऊ में हो रहा है,
अभी यहाँ कहां हुआ?
मतलब सर पर जब कुछ होगा तभी बोलेगी!
क्या ये सहनशीलता है या मूर्खता?
रोज सीमा पर सैनिक श हीद हो रहे हैं,।
हिम स्खलन हो तो सेना।
बाढ हो तो सेना। कहीं
कोई घटना हो तो सेना।
क्या सारा ठेका सेना का ही है?
क्या सेना को जवाबी कार्यवाई की छूट नहीं होनी चाहिए?
क्या सेना में भर्ती बढाई नहीं जानी चाहिए?
क्या फिल्म सेब ढते क्राइम के कारण फिल्म बंद नहीं होनी चाहिए?
क्या अवांछित कलाकारों व अन्य नागरिकों का भारत में प्रवेश बंद नहीं होना चाहिए?
क्या देश के जवानों को सुरक्षा नहीँ देनी चाहिए?।
क्या होगा अगर आपके किसी सम्पदा पर कोई संदिग्ध
गतविधि होने लगें तो क्या आपके फंसने कइ खतरा नहीं है?
क्या ऐक मकान ही काफी नहीं है?
ये सब ट्या संवेदनहीनता नहीं है अपने परिवार व समाज के
प्र-ति?
क्या होगाइतने पैसे और मकानों कारों का, अगर आप सीमा पर असुरक्षा बढा रहे हैं और अपने परिवार व देश को खतरे में डाल रहे हैं ?
क्या आप जिन देशके लिए
भारत का अमनचैन छीनरहे हैं, वो आपको अपना मानते भी हैँ? क्या आपने खुद अपने धर्म ग्रन्थ पढे हैं?
क्या ये जीवन बारबार मिलता है कि आप इसे यूं खराब करें?पसंद आने पर शेयर करें।

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One thought on “संवेदनहीनता”

  1. बिलकुल सही कहा——सभ्यता पुनः परिवर्तन के दौर में है, एक ग्यानी योद्धा रावण अपने अहंकार में सोए योद्धाओं को भी मरवा दिया जिसे हम रोज पढ़ते है परंतु बचे हुए बच्चों एवं औरतो के चीख को मह्शूश नहीं करते—रावण गया अशंख्य चीख छोड़ गया अब असंख्य रावण न जाने कितने चीख छोड़ेंगे साथ ही पता नहीं कौन कब इसका शिकार होगा।परिस्थिति ऐसी है कि एक न एक दिन सबको भुगतना होगा ।

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