महाभारत के समापन पर

जब कृष्ण ने समस्त योद्धाओं व कौरवों की मृत्यु
का समाचार गांधारी को दिया तो उसने
वहाँ जाने की जिद की। व कृष्ण को बुराभला भी कहा।
बुरा भला कहने के बाद वह वहीँ रण भूमि में
रुक गयी और वहीँ बैठ गयी। कृष्ण ने वापस
चलने की जिद की पर वो वापस नहीं आई।
अगले दिन से ही दुर्गंध व
बदबू का अंबार गया।
अब तीन चार दिन ही हुए
थे कि
उस दुर्गंध में सांस लेने में परेशानी होने लगी।
बडी मुश्किल से 
उन
मृत शरीरों को एक जगह ढेर किया और
उनके सहारे पेड
पर चढ फल तोडकर खाए व घर वापस आ गयी।
कहने का क्या ये अर्थ नहीं है कि मोह भी तबतक है

 जब तक सांसें साथ दें?  

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