जीवित खंडहर

अभी कुछ समय पहले ही तो हम अपने घर भाई, 

 भाभी व मां के पास गये थे।

 पडोसकी चाची के घर झांका, 

कोई उत्तर नहीं।

 मम्मी ने बताया, कल आयेंगी।
अगले दिन मिलने गये।
बोलीं, ) अब कोई नहीं आता है, 

न छोटे बेटे का बेटा आता है न बेटी।अकेले रहती हैं।

 क्या है ये सब?
आइआइटियन बन गये तो घर ही भूल गये।
तीन बेटे, 2बहू हैं, पर मांअकेली।

कोई मिलने नहीं जाता है।

बसस बड़े बेटे की दूसरी पत्नी रहती हे व मझले बेटे कीपत्नी व बच्चे आते हैं।
ये दोनों सगी बहन के बच्चे हैं। इनका मझले बेटे का परिवार व बड़े की पत्नी अच्छी है।

तीसरे सगे बेटे का परिवार।

 पापा व दादा नहीं हैं तो दादी से मिलने कोई नहीं आता।

बेटे की पत्नी व बच्चे तो बस।

 घर मेबस वही व उनकी बहन के बेटे की(बडे) पत्नी

 व उसकीभांजी रहते थे।

अब भांजी गयी तो किराए दार के भरोसे हैं।क्या इतना पढाना जरूरी है कि बच्चे दूर हो जाएं?
क्या ये जीवित खंडहर नहीं हैं?
 

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3 thoughts on “जीवित खंडहर”

    1. हां अब तो ज्यादा पढाने में भी डर लगता है। आज वो मेरे मां के पडोस मे हैं पर कोई नहीं है। मेरे मम्मी पापा ने एक दिन आवाज सुनी जैसे कोई जानवर बहुत गहरी सांस ले रहा हो, उन्होनें आवाज पर उत्तर न आने पर जाकर देखा, तो मेजर हार्ट अटैक पडा था चाची जी को।जमीन पर पडी थीं, फोन कर डॉ बुलाए व बेटे को भी बुलाया।बेटा डॉ था।

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