स्वर्ण मृग

लोग कहते हैं,अगर राम स्वर्ण मृग का शिकार क नहीं करते तो क्या सीताजी चोरी होतीं?

दशरथ अपने अगले जन्म में विष्णु को बेटे रूप में जन्म लेने को नहीं कहते ,तो क्या राम जन्म लेते?
दूसरे ब्लॉग में। है।
क्या
राम ने भक्त वत्सल होने के कारण ही भक्त नारद के वचनों का निरादर न कर श्राप झेला?
इसमें राम की क्या गलती जो
नारद ने ह रि रुप मांगा ?
क्या इसमें दशरथ की गलती नहीं थी कि राम को गृह सुख व पितृ सुख नहीं मिला?

कैकेयी ने रा म को घर से क्यों निकलवाया?
सीताजी को साथ नहीं ले जाते तो क्या करते,
सासें, बेटा तो रख नहीं पाईं,
पत्नी कैसे रखतीं?
क्या इसीलिए राम ने बहु विवाह प्रथा बंदकर एक विवाह प्रथा नहीं चलाई, कि उनके भक्त चैन से रहें? राम लक्ष्मण चाहते तो शादी कर सकते थे
सूपर्णखा से?
वो भगवान् हैंक्या वो सीताजी को नहीं ला सकते थे?
क्या सीताजी रूपा लक्ष्मी को स्वर्ण म की जरूरत थी?
क्या सीताजी जेवर नहीं फेंक ती चलतीं तो राम को पता नहीं लगता ?
क्या राम विभीषण से दोस्ती नहीं करतै तो पतानही गता कि रावण की नाभी में अमृत है?🐻🐫
काया सुग्रीव से दोस्ती नहीं करते तो सेना नहीं जुटा पाते?🐎
क्या शहर भ्रमण गोपनीय तरीके से पता नहीं लगता कि धोबी क्या कह रहा है?
क्या सीताजी अग्नि परीक्षा
नहीं देतीं तो क्या प-वित्र नहीँ थीं?
क्या सीताजी को जंगल में बाल्मीकि ऋषि के आश्रम के पास नहीं छुडवाते, तो तीनों रानियाँ तंग नहीं करती ं?
अगर राम अश्वमेघ यज्ञ नहीं करते तो उनके बेटे उन्हें मिलते?
नहीं,

जब तक आप किसी को
कुछ नहीं कहते,
जब तक वो आपके साथ ठीक से व्यवहार कर रहाहै।्
क्योंकि राण नहीं मर पाता, न ही उसके साथ के सारे राक्षस।
तभी प्रभु विष्णु अवतार लेते हैँ, जब जब पृथ्वी पर अधर्म व अत्याचारों की बाढ आ जाती है।

हर प्रश्न का उत्तर प्रश्न में ही है।
दशरथ वर नहीं मांगते, तो राम जन्म होता क्या?
नारद को घमंड नहीं होता, तोवो बुरा बोलते क्या?
तीन मां नहीं होतीं,
तो राम को चैन से मां व पिता का सुख
नहीं
मिलता क्या? स न ही सीताजी जंगल जातीं, न मारीच मामा मरता?
न सूपर्णखा पीछे पडती, न ही नाक कान कटते,
न ही रावण आता, न ही बहुरूपियों
के बारे में पता लगता कि धोखा भी होता है
न ही रोता सुग्रीव मिलता, न ही बाली मरता।
न ही अथाह सेना मिलती। न ही विभीषण मिलता। बस जाते और सीताजी को ले आते। फिर अधर्म व अत्याचारों का अंत केसै होता? रावण को दलबल कुटुम्ब
स-हित मार पाते।
रावण के शत्रु मिलते। तो हम भी नहीं होते। रामराज्य तभी होता है, जब ससब मिलकर कोशिश करेंगे।।

दशरथ,
श्रवण कुमार को आखेट में नहीं मारते,
तो क्या पुत्र वियोग का

श्राप मिलता ?

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