कृष्ण

 

कृष्ण मन मोहने वाली बांसुरी बजाते थे।

गाय का घी दूध छाछ मक्खन खाते थे, गाय नहीं

 गायों को पोषण देने वाले पर्वत गोवर्धन की इसीलि ए पूजा करवाई कि इससे गायों कै चरने के लिए घास है व यमुना नदी का पानी
भाप बनकर इसी पर्वत से टकराकर यहीं बरसता है व
ह रियाली बनी रहती है।जनता का भ्रम दूर किया कि ये इंद्र नहीं विज्ञान है।

छोटी सी उम्र से ही, अकल से असुरों को मारा।
। गोपिकाओं को हमेशा कहा कि घर में नहाओ, पर नहीं मानतीं थीं, बिहर न नहाएं 

इसलिये कपड़े चोरी करके इसी शर्त पर वापस देते थे कि बाहर कोई नहीँ नहाएगा।

पर कहने ही क्या, सब ये कहकर अपनी तुलना कर,  अपने को भगवान् समझते हैं?कृष्ण के विषय में अन्य ब्लॉग देख सकतै हैं।

Advertisements

3 thoughts on “कृष्ण”

  1. बहुत अपने कविता जिसका अर्थ है, हालांकि मैं समझता हूँ कि यह एक बहुत खर्च। बहुत अच्छा।

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s