जवान

यह भारत माता जिसकी अनगिनत संतानों के रूप में आबादी गिनाई जाती है, उन सबको लडकर आरक्षण का अधिकार तो चाहिए ,
पर अपनी मां के लिये उनमें, क्या सीमा पर जाकर उसकी रक्षा की ताकत भी है सबको अधिकार चाहिए? अगर ज्यादा पढकर जॉब नहीं नहीं कर पा रहे हैंतो इतना तो कर ही सकते हैं? क्या जरूरी है कि नेताओं द्वारा हांककर रैली में दंगाकरें?
क्या आपको ये नहीं लगता कि भगवान् ने आपको अपने जैसा क्यों बनाया है कि आप अपने दिमाग से काम नही लें?

पर करना कोइ क्यों नहीं चाहता है?
सुरक्ष भी सबको चाहिए पर सेना में क्यों नहीं जाना चाहता है? जरूरी नहीँ है कि अगर कोई
ज्यादा पढ नहीँ पा रहा है, पर उसमें बाहुबल हैं तो उसे देश की रक्षा के लिये सेना में भर्ती होना चाहिए ।
किसी का मोहरा बन तोड़ फोड मचाना व जेल जाना क्या जरुरी है?
जो ये सब करवाते हैं क्या वो कभी खुद ये कर जेल जाते दिखे?
क्या सेना में भर्ती से मान नहीं बढता है? जब ज्यादा से ज्यादा सैनिक होंगे तो क्या देश की ओर कोई आंख उठाकर देखने की हिम्मत भी कर पाएगा? आज क्या किसी को इससे पहले मालूम भी था कि देश में क्या हो रहा है,? तो फिर क्या आप इससे सहमत हैं अगर हां तो ज्यादा से ज्यादा शेयर व लाइक करें।

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One thought on “जवान”

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