जनता

सडकें तालाब बनी हैं,
नदी नालों में बदल गयी हैं। 

सडकोंb> पर सुरक्षा नहीं है, 

किसानमर रहे हैं, 

बिना पढे
डिग्री मिल रही हैफिर भी यह सालों से चल रहा है।

किसी ने विरोध नहीं किया।
अगर अब सरकार पढाकर,

 वैध लाइसेंस द्वारा हर काम कराना चाहती है, 

तो जनता विरोध क्यों करती है?
जनता को

 शायद नहीं मालूम कि पढकर काम करने पर

 कोई उसे बेवकूफ बनाकर, जमीन जायदादया कुछ भी नहीं छीन सकता है।

क्योंकि वो पढ लेगाकि पेपर में

क्या लिखा है?

“सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं में टेपवर्म, हुक वर्म,फाइलेरिया आदि बीमारियाँ होती हैं।”

अगर सरकार वैध तरीके से 

पोल्ट्री फार्म,   

बकरी पालन 

भैंस पालन व 

अन्य तरीके से काम कराना चाहती है तो इसमें बुराई नहीं है, 

कया फिर आप अच्छे से संस्थान से अच्छा जानवर का मीट अपने घरवालों को खाने को नहीं देंगे?

क्या फिर आपके कुटुम्बी स्वजन स्वस्थ नहीं रहें गे? गा

गाय का मीट सबसे ज्यादा नुकसान करता हैजैसै, गाय का दूध बसे ज्यादा फायदा करता है।,

पालते तो सब हैं, गाय की खासियत यही है कि उसका दूध जितना फायदा करता है,
मीट उतना ही नुकसानदेह है।

इन जानकारी के लिए विज्ञान पढना जरूरी है। 

कहने से कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ता।, ये कहावत च रितार्थ होती है। 

इसमें किसी धर्म नहीं, सबके लिए एक ही नियम है।
अगर कोई इसपर भड़कता है, 

इसका सीधा अर्थ है कि वो जनता को बीमार, अनपढ देखना चाहता है। 

वो खुद व उसका परिवार तो पढा लिखा होता है। 

ये जो भी पढे, 

ये जरुर वॉच करे

 कि क्या भडकाने वाले, 

या उसकी कोई एक संतान

बहुत ज्यादा पढा होता है

व खुद तो शांत बैठता है 

पर जनता को बस यूं हु

भडकाकर सत्ता सुख भोगता हो।

इसलिये जागो,    

अगर आप भारत को अपना देश व खुद को भारत का नागरिक जो कि बाहर आपकी पहचान है। 
हिंदू (मुसलिम पंडित कायस्थ क्षत्रिय वैश्य व अन्य , हम किसी को द लित नहीं मानते, ससब अन्य जाति हैं ) मानते हैं 

 तो आप धैर्य रखें, 

भड़काने वालों की बातों में न इकर किसी का वोट बैंक न बने।


 हिंदू भीमीट खाता है, पर गरीब मुसलिम व किसान व अन्य जात को पढने नहीँ दिया गया, कि वह कोई और काम कर रोजगार करे।

आप किसी पढे लिखे से कहो, क्यइ वो खुद दुकान पर बैठकर ये काम कर धन बनाना पसंद करेगा?

आप पन्नी के थैले पसंद करते हैं,इससे कहीं सामान नहीं ले जाना पड़ता है।
पर कभी इसका असर देखा है,
इसे कहीं जलाए ं
या नष्ट करें,
ये नष्ट नहीं होती है,

इसमें कोई फल रख दें तो सड़ जाता है,
पानी बांध कर रख दें
तो दो दिन में महककर खराब हो जाहै,
ये आप कुऐं व हैंड पम्प व नदी तालाब का पानी पीते हैं
तो वो भी इसके
जमीन में होने से खराब व जहरीला हो जाता है।
क्या
आप जहरीला पानी पीना चाहें गे?
सरकार इसे कहीं न कही तोदबाऐगी,
इसको जलाने से भी हवा जहरीली हो जाती है। क्या आप साफ पानी नहीं पीना चाहते हैं।

आरक्षण 

में भी यही बातहै, किसी खास जाति को आरक्षण(बिना पढे पास) दो, फिरजब कोई धोखा करे तो  कंगाल हो जाओ।। 

हार्दिक पटेल ने कहा था, कि धन वो नेता क्यों बना?

बस यही हरेक करता है।
जागो जनता सारी, अब सोचो हर।
टैक्स
कभी सोचा सब टैक्स माफ कर दिऐ तो सरकारकहां से सुविधाएँ देगी? सडक बिजली पानी घर व वैध रजिस्टर्ड बिज़नेस।
हमने केंद्र सरकार को दिया, तभी तो राज्य सरकार को देगी।
राज्य सरकार अगर सब मुफ्त देगी तोजनता की तनख्वाह हड़प लेगी।

 

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