इंसानियत

संड्क पर चंदन, कालू, भूरो और और कबरी रहते हैं। 

कबरी के तीन पिल्लों में से

 पहले दो रोडरोलर से दब गये।

एक ने दुख में प्राण छोड़ दिए।
फिर अगली

 बार छ: में से दो पिल्लेएक मरा चूहा लिये घूम रहे थे।

शायद किसी ने चूहा मार दवा डाल दी हो। 

अगले दिन वो दोनों भी नहीं उठे। बाकी

 नासमझ चारों, 

बेखबर मां को छोड़ जानेकहां चले गये।कभी दिख जाते हैं, 
चंदन, 

  अपने चौराहे पर रात को एक डंडा मुंह में दबाकर बैठता है।

किसी अंजान

 को झाँक ने 

भी नहीं देता है।
कालू, 

सिंगिल, गुप्ता जी का लाड़ला है,

 वो उसके लिए, 

आधा किलो दूध, व दोनों समय भोजन पानी रखते थे,
अचानक एक दिन उनका एक्सीडेंट हो गया।
उनकी बेटी उन्हें अपने ससाथ सिंगापुर ले गयी। 

अब बेचारा

 कालू….
भूरी के दो पिल्ले, 

कबरी 

उनमें से एक को अपना समझकर साथ लिए घूमती हो।

वो उसके एक पिल्ले जैसा है।

 भूरी को समझ नहीं आता है,  कि क्या बात है, 

जिस दिन उसका छोटा पपी नहीं दिखता है, 

वो भूखी प्यासी ढूंढ कर वापस लाती है, 

 अब भूरी, 

  अपने बडे़ पपी को,  

भी लेकर कबरी के साथ ही रहती है, और बनरहे मकान के छज्जों पर बैठकर निगाह रखती है। ये इंसानियत इंसान में भले ही न हो पर जानवरों में है।
ये सब यहीं रहते है।
चंदन, फॉगीब्लॉग वाला है।
जो जमा देने वाले 

तापमान में 

सबको ये बताता है कि 

पृकृति से दोस्ती कर लो तो वो

 अनुकूल हो जाती है। /b>



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