समझ

्अभी तक आपने कभी ध्यान न दिया हो पर अब दें व देखें कि
जिन्हे हम जानवर कहते हैं,
वो इंसान से ज्यादा समझदार होते हैं।
आपने मेरे ब्लॉग में मेरे तोते मिट्ठू , बंदर,
सड़कों पर घूमते कुत्तों खरगोश व
पक्षी आदि के विचार
देखे होंगे।सब की अपनी सोचने की क्षमता है पर आदमी जैसे ही नहीं उससे अच्छी।आदमी में भावनाएँ खत्म हो गयीं हैं वो केवल वही सोचता है जहां वो फायदा देखता है।अगर नाम भी भगवान् पर ही हो तो कहने ही क्या? फिर तो मैं भगवान् हूं। मेरे पैर छुओ।
मैं पैसा फेंकूं तो दौडकर नौकर की तरह काम करते हैं।इतना घमंड कि जीना मुश्किल है। बस अरे तू क्या है?
मेरे आगे किसी के सर उठाने की औकात नहीं है।/ऐसे लोग अपना जीना हराम कर लेते हैं। b>

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