कृष्ण की पसंद#3

कृष्ण की पसंद अर्जुन ही क्यों था?

  • एकलव्य एक भीलबालक था।
  •  वह द्रोणाचार्य के पास धनुर्धर बनने आया।
  •  पर उसे द्रोणाचार्य ने यह कहकर कि वह केवल राजकुमारों को ही सिखाते हैं, कहकर तीरंदाजी सिखाने से मनाकर दिया।
  • उसने अपने-आप तीर चलाना सीखा, पर वो भोला था, 
  • उसने एकबार तीरों से अर्जुन के सबसे बडे भाई युधीष्ठीर के कुत्ते का मुंह एक बार में ही बंदकर दिया था।
  • द्रोणाचार्य के पूछने पर उसने कहा कि मैंने आपकी मूर्ति बनाकर तीरंदाजी सीखी है।
  •  द्रोणाचार्य ने उससे गुरू की फीस में उससे सीधे हाथ का अंगूठा मांगा कि वह अर्जुन से अच्छा तीरंदाज न बन सके।
  • क्या यह द्रोणाचार्य की खराब नीयत नहीं थी?
  • अब तो बचा ही अर्जुन था, फर्क ये है कि वो उस समय था जब कृष्ण आए।
  • एकलव्य को द्रोणाचार्य के कारण अपना अंगूठा खोना पडा। अंगूठा न होने से वो कोई कार्य न कर पाने से गुमनामी में खो गया।
  • ये अर्जुन समझदार था।


    अर्जुन कृष्ण की सगी बुआ कुंती का बेटा था।कृष्ण के पिता वसुदेव की बहन।

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