कभी मत कहो11

  • उल्कामुख नामक एक राजा था
  • उसने अपनी पत्नी के साथ भद्रशीला नदी के किनारे सत्य नारायण विष्णु भगवान का पूजन व ब्रत किया।
  • उसी समय एक साधु नामक वैश्य वहाँ आया।
  • उसके कोई संतान न थी।
  • उसने संतान होने पर ब्रत करने का संकल्प किया।
  • घर जाकर पत्नी लीलावती से भी कहा।
  • हंसी खुशी दिन बीतने लगे।
  • उसके घर सुन्दर सी कन्या हुई व चंद्रमा के समान बढने लगी
  • उसका नाम कलावती रखा।
  • उसने कहा, मैं शादी के समयब्रत करूँगा।
  •  ब्रत फिर भी नहीं किया। 
  •  जब धन व दामाद के साथ लौट रहा था तो भगवान एक दण्डी साधु के रूप में आकर पूछने लगे कि नाव में क्या है?
  • उसने कहा, लता पत्र् आदि।
  • सब धन लता पत्र हो गया।  
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