खामोशी#148

खामोश दि न हैं बेसबर रातें, 

दिन में केव ल काम था, 

रात में मनमें सबसे ज्यादा शोर जब घुमड़ ती हैं 

 जेहन में सारी बातें।
कुत्तों की गुरराहट व रह रहकर भौंकना, 

झींगुर की टीन टिन, 

समाधिस्थ मेढक का जागकर टरटराना।

ये सब खामोश वातावरण को और गहरा बनाती हैं।

रात की खामोशी को चीरती हुई….. कुछ अनकही बातें……. 

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