जमीनी जुडाव#149

वो अभी भी वहीं है।
, अंग्रेज़ भी आये,
पुर्तगाली आये,
मुगल भी आए।
सब चले गये।
मेरी परदादी, दादी, बाबा, पापा, उन सबका वो दोस्त था।
अब मेरे भाई भाभी उनके बच्चों व मम्मी का।
हम सबका भी है।
सबने उसके साथ पूरा

 जीवन बिताया।

उम्र कम से कम 250 साल…….

वो  लगभग60फुट का……. 
पता ही नहीं चला कि गर्मी क्या होती है?
हम सब वहीं उठते बैठते

 खेलते खाते व सोते थे, घूमते रहते थे।

हर पक्षी व जानवर का भी वही आसरा है।
वो हरेक का बाहें फैलाकर स्वागत करता है। 

पीली आंधी, काली आंधी या तूफान आने पर
हम सब उसके पास एकत्र
हो जाते थे
और आंधी का आनंद लेते थे।कभी उसके हिलने व आंधी में झूमने
से डर नहीँ लगा
बल्कि लगा कि वो
खुश होकर हमारे साथ लय में झूम रहा है।
हम सब रात में उसी के पास छज्जों पर सोते थे
पीपल के पेड पर कोई भूत नहीँ होते हैं।

 वो सन1945 में भी ऐसे ही खडा था जैसे अब।

भी भी जब हम घर जाते हैं, 

उसका एक पुराना दोस्त,   गुलमोहर हर आंधी में टूटजाता है

 पर फिर उठकर अपने दोस्त की लटकती शाखाओं,  तक पहुंच ही जाता है, व

 बातें करता रहता है। 

और हर मौसम में 

ऐसा लगताहै जैसे 3मंजिला गुलदस्ता हो।
पीपल व गुलमोहर बहुत मशहूर है।  

वो अपनी जड़ें मजबूती से जमाए रखते हैं तभी आज अस्तित्व में हैं। 

क्या हमें अपनीजमीन से जुडकर पूरी ताकत के साथ खडे नहीं होना चाहिए 

साथ खडे होकर काम नहीँ
करना चाहिए ? 

गुलमोहर क्या हमें बार बार टूटने के बाद भी खडे होकर 

मजबूत व अच्छे लोगों के साथ खडे होने को नहींकहता है

ऐसा ही है मेरे

   घर के सामने का                    पीपल। ,

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