Heaven

  • स्वर्ग में अप्सराएँ होती हैं।

  • इंद्र देव स्वर्ग के राजा हैं।

 पुराणिक कथन के अनुसार, इंद्र पद के लिये यज्ञ करते हैं। जो यज्ञ हजारों-लाखों की गिनती में होते हैं।

  • पर दूसरा रास्ता भी पुराणिक है।। 
  • हमारा कैलाश पर्वत आज चीन (चाइना)में है। 
  • गंगा जी भागीरथ के तप पर यहीं कैलाश पर्वत पर सीधे उतरीं थीं।
  • चाइना जो पुराने समय में भारत का ही एक भाग था। 
  • गंगा स्वर्ग में रहतीं थीं।
    उनकावेग संभालना मुश् किल था। 
  • राक्षस भी हमेशा स्वर्ग पर आक्रमण कर उसे जीतना चाहते थे। 

जब भी किसी ने तप किया, इंद्र के कान खडे व तिकड़म लगानी शुरु , कि
तप कैसे भंग हो, ये न हो वो स्वर्ग पर आक्रमण कर दे।

फिर सबके पास भा गो, कोई तो बचाओ।

  • जलंधर ने भी स्वर्ग पर आक्रमण की योजना बनाई थी।
  • ये हमारीगैलेक्सी तो एक जरा सा भाग है। 
  • जहां, एक प्लेट के रूप में बहुत सी गैलेक्सी फैली हैं।
  •  उसके ऊपर, चीन के ऊपर स्वर्ग व नीचे पाताल। 
    महाभारत के युद्ध के बाद बस पांडव बचे थे। 
  • युधीष्ठिर  भीम व अर्जुन ने स्वर्ग यात्रा शुरू की। वौ सब   अभी के चीन में   स्थित कैलाश पर्वत
    तक गये। पर एक एक करके बर्फ के कहर से मरते गये, पर युधिष्ठिर व उनका कुत्ता बच गया। वहाँ वो एक मैदान पर पहुँचे जहां से लेने उन्हें विमान आया था। 
  • लोग कश्मीर के पीछे बिना बात के लड़ते हैं जबकि स्वर्ग तो चीन के ऊपर है।  तभी वहां के लोगों की उम्र  100 से ऊपर है। 

    चीन में है।
    । गंगा जी को स्वर्ग से भागीरथ ने उतारा था।भागीरथ के 60000 हजार पूर्वजों की राखथी। [(जिन्होने क -पिल मुनि के आश्रम में अपना यज्ञ वाला घोड़ा बंधा देखकर अपमान किया था जबकि कोई और उस आश्रम में घोड़ा बांध गया था,पर वो सब मुनि का अपमान कर रहे थे।उन्हें क पिल मुनी ने श्राप से भस्म करा था,
    ब्लॉग गंगासागर )। भागीरथ ने तप कर गंगाजी से कहा, गंगाजी नै कहा कोई मुझे संभाल ले, मुझमैं बहुत वेग है।सब जगह राख के ढेरों को देख भागीरथ ने ब्रह्मा का तप किया।उन्होने विष्णु का तप करने को कहा। विष्णु ने गंगाजी का तप करने को कहा। गंगाजी ने शिव जी का तप कर अपने वेग को जटाओं में बांधने को कहा।]

    • स्वर्ग से उतरते ही, चीन में कैलाश पर्वत पर बैठे शंकर ने जटाओं को खोल दिया।
      अर्थ ये कि कैलाश पर्वत के आसपास या ऊपर ही कहीं स्वर्ग है।
    • कृष्ण ने जब धरती छोड़ी, उसके पहले वो गोकुल गये, सबको बताया कि मैं आखरी ग्वाला हूँ और सब द्वारका में हैं।।
      और मैं भी थोड़ा समय  बाद आराम करने जइ जा रहा
    • विश्वा मित्र की तप भूमि भु यहीं है, जहां से उन्होंने त्रीशंकु ऋषि को अपने योग की ताकत से उठाकर स्वर्ग भेजने की कोशिश की थी।
    • अयोध्या के राजा राम भी, सब राजपाट लव कुश व उनके बच्चों को देकर सरयू नदी में उतरकर इसी तरफ चलते चले गये थे जो यहीं कि मार्ग है।
      वहाँ पर राम का वो पुष्पक विमान, जो रावण से जीता था, खडा करते थे।रावण ने भी इधर से ही स्वर्ग जाने की कोशिश की थी ये वो सात सीढ़ी टीवी में दिखाई गयीं हैं। समुद्र मंथन से निकलनै वाले अमृत को, ज ब आकाश मार्ग सेस्वर्ग ले जाया जा रहा था, तब कुछ बूंदें उज्जैन व गंगा यमुना व सरस्वती के संगम प्रयाग में पडीं। तबसे वह स्थान अमर हो गया व वहाँ कुम्भ व महा कुम्भ का मेला लगता है।

      प्रयाग यूपी में है उसके आगे चीन।

      अमृत
      दूसरी ओर चीन ले जाया जा रहा था।
      मिस्र के पिरामिड :-क्या
      कभी सोचा कि इतने भारी पत्थर उठाकर रखकर आकार देना, क्या इतना आसान है?
      खभी पिरामिड की संरचना पर ध्यान दें तो पता लगेगा कि इनमे ऊपर बै

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