Spring#48 KARM:

एक फूल ने कहा, मैं भी उसी बगीचे में खिला, जहां तुम।  फिर हमारा भाग्य अलग क्यूँ? किसी भी बच्चे के भाग्य पर उसके मां बाप, बाबादादी व उसके साथ रहने वाले सब लोगों का असर पड़ता है।
धरती भी मां, गौ भी मां
दोनों देने वाली
पर
दूसरे के कर्मों कि फल भोगती हुई —
यही तोफल है आसपास व मांबाप के कर्मों का, जो ज्यादा प्रभावी होते हैं वही मिलते हैं।मां के त्याग देने से उसे अच्छी परवरिश नहीं मिली। 

जिसका फल उसने जीवन भर पाया, तभी वो कृष्ण को भी 

  • महाभारत में कर्ण सूर्यपुत्र था। पर उसने मां कुंती के कर्मों के कारण जीवनभर तिरस्कार
    झेला , पैदाइश भी कर्म है।
    कर्ण व एकलव्य दोनों अर्जुन से ज्यादा गुणी थे।

    हमारे साथ केवल हमारे नहीं, आसपास सभी के कर्म जुड़े हैं।

    ब्लॉग कृष्ण, एकलव्य व योग

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