Friends of our ancestors6 :

हमारा घर जब बना था, 

हमारे दादा ने कानपुर में 1950 में जब
घर बनवाया था तो वहाँ भी जंगल था।उस वक्त आसपास कोई आबादी नहीँ थी।तीन मंजिल ऊंचा मकान। 

 केवल घना जंगल।

वहाँ बहुत बड़े-बड़े पेड़ थे। 

पेड़ों पर बहुत से पक्षी रहते थे,। 

वो गुलमोहर व पीपल के दोनों पेड़, हमारे पुराने घर के सामने तब से खडे हैं जब हमारे दादा ने व्यापार करने की व अपना घर बनाने की सोची।
तब दूरदर्शन, कार, कुछ भी नहीं था, तो इन्ही पेड़ों के नीचे बैठकर बाते करते व खाना-पीना खाते व सोते थे।मेरी परदादी 1890 में पैदा हुईं थीं, भी उस घर में रहीं थीं व वो दादा, दादी का मेरे पापा का, भी दोस्त रहा है। अब मेरी मां भाई भाभी भतीजे भतीजी व मेरा भी। या कह लो।कुटुम्ब दोस्त। हम सब उसकी मजबूत शाखाओं में अपने सुरक्षा महसूस करते हैं। 

 उसकी हर वक्त सबको आसरा देने की आदत भीबहुत अच्छी हैशायद अभी वो 300/400 साल और चलेगा व सबको अपनी तरह अटल रहना —–

© [Reena Kulshreshtha] and [glimpseandmuchmore.wordpress. com], [2017].

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