Imp-8,  Friend NEIGHBOUR:

ये मेरे पडोसी का घर है।

ये एक दर्जी हैं। हम यहीं कपड़े बनवाते हैं। ऊपर विकी लंच कर रहा है।उसकी दादी मां कहती हैं, उसकी सास की सास भी यहीं आईं थीं शादी कर।ये इनकी सभ्यता है। ये घर की खाली जमीन पर गेंहू उगाते हैं , जो सालभर चलता है।
आम, अमरुद, जामुन, शरीफा, केला, कटहल, मैथी, सोया पालक, सहजन, ईंधन की लकडी के पेड सब घर में ही उगाते हैं । पानी के लिए एक पानी खींचने वाला यंत्र है। ज्यादा से ज्यादा 100/150फुट जमीन होगी।
ये परंपरागत रसोईघर है,इनका कहना है कि पहले यहां जंगल था। 

हम इस द तिया मार्ग से पहले जाते थे तब भी जंगल था। ये जंगल में रहते थे रहते थे।करीब 150 /200सालों से इनका कुटुम्ब यहीं है।ये मिट्टी के बरतन में चूल्हे पर भोजन पकाते हैं। गैस है पर ये पसंद नहीं करते। कहते हैं, इसका आनंद ही कुछ और ही है।

मेरा खयाल है, अगर सब इसी तरह घर बनाएं तो क्या सुख नहीं है? 

क्या घर को अजायबघर की तरह, बनाकर बीमारी पालकर,नौकरों की फौज रखकर,कोई काम न करना, किटटी, व ऊंचा शो करनाही
सुख है क्या ?

© [Reena Kulshreshtha] and [glimpseandmuchmore.wordpress. com], [2017].

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2 thoughts on “Imp-8,  Friend NEIGHBOUR:”

  1. एक अच्छा सवाल है। हम दैनिक नहीं है और कभी कभी हम सामना करना पड़ता है और हम इसे नहीं देख सकता। उत्कृष्ट आप क्या लिखते हैं। बहुत अच्छा।

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