)समाज:-

#कभी सोचा है, कि ये समाज क्या है?
#कहते तो हर बात परसब यही हैं कि ये समाज क्या कहेगा?
#पर कभी सोचा है कि हम कि स समाज की बात कर रहे हैं,
# जो हमारी परेशानी पर हंसता है। हमने इतने समाज खडे कर दिए हैं कि देश टूट ने लगा है।
#कोई अपने को काछी, गहोई यहॉं तक कि उसमें भी, गुप्ता, गहोई, वैश्य अलग अलग।
#साहू में भी साहू व वैश्य अलग अलग समाज।

#सुपरविजन की इतनी इच्छा कि
एक कास्ट में भी अलग अलग ग्रुप बनाम समाज।
#हर वक्त दूसरे की बुराई, व समाज के नाम पर किटीपार्टी ,
वपार्टी के नाम पर चिटफंड।
#किटी के नाम पर अपने ही एक होटल में पार्टी अरेंज करना।
#25या 40मेम्बर्स की पार्टी।
#पर प्लेट कम से कम 250/-काटकर 10,000/-की अपने होटल की कमाई करना,
# कई किटीजॉइन करके व अपना जमा किया 2000भी निकालना ,
#अगर पर मेम्बर 2000/-जमा हुए तो।
#वजो किटी न करे उसे नीचा
दिखा ना।
#और कहना ये हमारा समाज है।
#क्या ये समाज है या गृह युद्धहै?
# इसमे इतने व्यस्त कि हमें पता तक नहीं कि देश में क्या हो रहा है?
#जागो और देखो कि भारतमाता  वपुकार रही है व देश भी।

#सब अपने प िर वार
को ही जॉब दे रहे हैं, फिर कहते हैं हम आपको ये देंगे ,
वो देंगे।
8नवम्बर को 500व1000/-नोटबंदी हुई पर कि सी ने गरीब को
दिया?
क्या हुआ जो जनता का धन कागज
हो जाए प उस र सरकार के व सेना केकाम कैसे आना चाहिए जो हमारी रक्षा करती है यही हर उस व्यापारी की सोच है।जो,

हिन्दी अपमानित होरही है,
वो भी हिन्दुओं के द्वारा ही।
अगर हम अपनी भाषा का अपमान करेंगे तो क्या कोई हमारा मान करेगा?
अगर सही लगे, तो शेयर करें व औरों को भी समझाएं।

           SANGHARSH 87

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