wt do u eat:-

#पेट कोई कूड़े का डिब्बा है
क्या? कुछ भी खालो, चलेगा
नहीँ
#जब कोई बेबी हो-मिल्क

#बडा व्यक्ति -हर चीज

#ये तरीका ठीक नही है। 

#हर स्टेट, हर शहर हर देश की अपनी पैदावार है, जो वहां के व्यक्तियों के लिए उपयुक्त है। 

#जैसे, कहीं ठंड है तो वहांजो उगता है वही खाएं तोही स्वास्थ्य सही रहेगा। 

#ज्यादा खाने से उस डायनासोर्स जैसी हालत हो जाती है,
#जो अपने विशाल काय शरीर के हिसाब से खाते थे व सारे पेड़पौधे खा कर भूखे मर गये।
#हर कॉर्डेट्(रीढ़)में हाइड्रो क्लोरिक अम्ल होता है।
#वातावरण के हिसाब से हर
जंतु के दांत, चोंच व खाना।
होता है।
# जो उसकै जन्म से होता है। #वो उसका उपयोग कैसे करता है। #इसके साइड इफेक्ट बाद में प्रगट होते हैँ।
#बंदर सब खाता है अत:उसके दांत न नाखून बडे व पैने हैँ, #जिस बंद र ने
कायदे से खाया उसकी आने वाली पीढियां आदम बन गयीं।
#जैसे आदमी की पूंछ,
#सांप के पैर।
#वैसे कभी किसी ने शायद ध्यान नहीं दिया, सुना तो होगा कि—–
#ये सब जंतु जो एक,दूसरै को खाते है,
#इसे प्राकृतिक सफाई कर्मचारी कहते हैं।
#भगवान ने ये इतनी बड़ा संसार बनाया है,तो 

#क्या वो दिनभर सफाई करेगा।
#उसने तो सफाई कराने की व्यवस्था की है।
#हर जंतु अपने से कमजोर को खा जाता है।
कीड़े को पक्षी, पक्षी को सांप, सांप को मोरव गरुड़, गरुड़ व अन्य पक्षी को कुत्ते सियार गीदड व इन सबको चीते हायना खाते हैं।
जो बचे वो मिट्टी बन जाते हैं।

insectbirds, birds कोcat=>dog=>wolf=>lion n other animals

cow, goat etc को भी। 

बाकी सब soil में मिल जाता है। तो ये है भगवान का नगर निगम। 

हम इंसान जैसेकी क्या हस्ती। 

               SANGHARSH14

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