Food

It is of various types. You eat many things and worst things also.When any new thing  is launched by busimen,
you started to eat.

you don’t see its side effects.
You don’t see its formation process.
You don’t see its packing process.
You don’t see its rate with tex.
you don’t see its uses and harms.
Are
you not
like a cattle
only which moves on
only their master’s indication?
WHY?
Is your,stomach a dustbin?
IS your home a dustbin also?
Preservatives are harmful. Everything is preserved by them. They make a cause of sickness and disorders.



भगवान

इस पर बहुत बहस होती है, आखिर कौन है भगवान्?
आज इस बात पर मेरे बेटे ने भी पूछा कि हम राम को ही भगवान् क्यों कहते हैं?
चलो हम कोशिका से पहले जाते हैं।कोसरवेट।, जीवाणु,विषाणु।
इसके बाद कोशिका। चलो अमीबा से शुरुआत करते हैँ।
एक अमीबा बन गया।हम कैसे कहेंगे,कि वो मर गया या वो जिंदा है?
ये तो जब वो चलेगा नहीं, निश्चल हो जाएगा।
(मतलब उसमें ऊर्जा नहीं बचेगी।जब उसका एक कौशीय शरीर विकारों से भर जाएगा और ऊर्जा को स्थान नहीं बचेगा। ऊर्जा बाहर खुले में जाना चाहती है।ऊर्जा को बाँधकर नहीं रख सकते हैं। ऊर्जा चाहे कैसी
ग-ति करती है तभी तो उसका नाम ऊर्जा है। विकारों से भरे शरीर में स्थान न बचने से वो शरीर को छोड़ जाती है और  सब कहते हैं, अमीबा मर गया। )

यही नियम समस्त जीवों पर लागू होता है।
ये जगत एक विकासक्रम के
अनुसार चलता है। ये विकासक्रम कोसरवेट से शुरु होता हुआ, पहले एक कोशिका वाले, फिर
बहुकोशीय जंतुओं व पादपों तक चलता है।ये जंतु बिना हड्डी के होते हैं। इसके बाद हड्डी से बन जंतु आते हैं। यही तो विज्ञान है, ये विकासक्रम भी मत्स्य से ही प्रारम्भ होकर आदमी पर समाप्त होता है।पर कोई विज्ञान पढ़ ना ही नहीं चाहता है।
आगे इस ऊर्जा का
जो संचालक बन कर अपने अनुसार घुमा ले, वही भगवान्(भं-भूमि, ग-गगन, व-वायु, अ-आकाश, न-नीर), ध्यान योग के कितने उदाहरण देखने को मिलते हैं। इन पांच से मिलकर कार्बोहाइड्रेट बनता है, जो इस शरीर के निर्माण मे लगता है। जो अणु, परमाणु से बनता है। जिसके तरह तरह से विघटन से ऊर्जा बनती है।
गीता रामायण या किसी पुराण में कभी नहीं कहा कि मुझे पूजो।
पर
इंसान भी आरामतलब व स्वार्थी है।
उसे मालूम पड़ गया कि
फलां फलां दुनियां को अपनी ताकत से घुमा सकता है। डायनैमोजादूगर की तरह रूप बदल सकता है व कुछ भी बना सकता है। फराडे की तरह, दीवार पार कर सकता है। हवा में उड़ व पानी पर चल भी सकता है। योगी की तरह मन से पुकारने पर सुन कर सभी समस्याएँ दूर कर ससकता है, तो उसने इसको भगवान् कह दिया। और अपने कर्मों से मुंह मोड़ लिया।
जबकि
भगवद्गीता में भी कृष्ण ने कहा है,
कर्म करो।
कर्म किए बिना तोशरीर
का निर्वाह भी नहीँ हो सकता। जन्म लिया है तो कर्म तो करना ही है। पर
अगर तुमसे नहीं हो रहा है तो मुझसे कहो।और अगर मैं करूँगा तो क्या मुझे श्रेय भी नहीं मिलना चाहिए?
(अगर तुम किसी को एक गिलास पानी भी रोज देते हो, तो क्या उसके बदले पैसा और तारीफ दोनों नहीं चाहते? )
कर्म भी सोचकर करो, फल तो कभी न कभी मिलेगा ही।

{(न्यूटन का क्रिया प्रतिक्रिया बल) (दीवार पर सर मारने से सर फूटेगा ही, क्योंकि तुमने जो ताकत दिखा ई , दीवार पत्थर सी व निश्चल है, उसने वो बल वापस कर दिया, सूद समेत और सर फूट गया)} बस वो यही बताता है, यही समझाता है, नहीं तो जंगल राज होता।अब काम करेगा तो श्रेय भी नहीं चाहेगा।
उसने तो ये भी कहा है कि
अगर तुम ये कर सको तो तुम भी मुझ जैसे बन सकते हो।

जी एस टी

का अर्थ है, सामान पर लगने वाला कर. क्या आपने कभी दुकानदार से पूछा है कि आप जो दाम लेते हैं, उससे कम आपके द्वारा खरीदे सामान
पर लिखा है।क्या उसने आपको बताया
वो आपसे 109/-कै पीज्जा पर 130/- कर के लेता है? क्या आप कर नहीं देते? इपने तो दे दिया,पर उसने तो नहीं दिया?
क्या आप कर व्यापारी के घर खर्च के लिए देते हैं? सौंदर्य प्रसाधन, टाफी वअन्य सभी सामानसोना चांदी मकान,मकानों में लगने वाले सभी सामान पर कर देते हैं।पर व्यापारी नहीं देता? विपक्ष उन अज्ञा नी पढे व अनपढ वर्ग को भड़काकर सरकार के खिलाफकर रहा है, जो नुक्कड़ पर या अड्डे बनाकर बहस करते हैं।आप ध्यान दें तो आपको ज्ञात होगा होगा कि ये विपक्ष व व्यापारी वर्ग की मिली जुली साजिश है।आपका कर अब व्यापारी को देना पडेगा इसलिये वो बौखलाया हुआ है।आप दिन की शुरुआत से, चाय से लेकर, उपयोग में आने वाले हर सामान के पैकेट को पढें।तब आपको पता चलेगा कि आप तो हर सामान पर कर दे रहे हैं। और बहुत दे रहे हैं. और व्यापारी का घर भर रहे हैं।
आप सडक, पार्क,नलकूप, सस्ते भोजनालय सब चाहते हैं, तो इसका विरोध न कर सरकार को अपना काम करने दें।अगर आप अडानी व अंबानी की तरह सरकार का साथ दे सकते हैं तो अवश्य दें। सब सुविधाएँ हरेक परकर है? क्या आपमें हिम्मत है अपने पैसे को सरकारी काम में लगाने की? इस देश में पैसा तो बहुत है, परदेश के लिए पैसा लगाने वाले देशभक्त नहीं। किसी को तो ये काम करना ही होगा।
क्या इतनी योजनाएँ, व सुविधा, कभी मिली?
क्या इतने बड़े खुलासे कभी हुए?
क्या आपको अपने व्यापारी दोस्त से कभी जलन नहीं हुई, कि वो रोल्स रॉयस व लीमो में घूम रहा है, पर क्या ये सोचा कि आपने तो कर दिया पर वो भी देता है?
फिर आपने क्या सोचा कि आप व्यापारी को अमीर बनने देंगे, या सरकार को भी व्यापारी से वसूलने देंगे, जिससे वो आपको भी
और सस्ते दरपर दे सके?
आपने पीज्जा पर 29/-दिए।पर उसका सामान आटा व मसाला पर क्या उसने, सरकार को टैक्स दिया? नहीँ. ये ही खुलासे हैं आपके व्यापारी दोस्तों की कीमती व मंहगी शानो-शौकत के।
बस देखते जाइए, कुछ मंहगा नहीँ हो रहा है. आपका कररूपी खजाना बस व्यापारी को देना है। 

इसे शेयर अवश्य करें व जन जन तक पहुचाएं। 

सेवक

आज हर इंसान  दूसरे का सेवक ही तो है। बस पता नहीं चलता है कि वो क्या कर रहा है। 

नेता का पी ए कौन? 

इंसान ने तो भगवान को भी नहीं छोडा। सेवा करवाई। श्री राम औरश्री कृष्ण के गुरूऔं ने भी एक ओर उन्हें भगवान कहा दूसरी ओर स्वार्थ सिद्ध किया। 

पढाने के बहाने, जंगल भेज अपनी कार्य(यज्ञ)) लिए यज्ञ करते रहे और असुर मरवाए।
जो इस संघर्ष में ससससफल रहा, उसे तारीफ के पुल बांध सेवक बना लिया। 



सलाह

हरेक सलाह देता तो है, पर खुद अमल नहीं करता। अपनी मजबूरी दिखा, किनारा कर लेता है। 

उकसाने कर दूसरे को दूसरी जगह रवानाकर देता है।  अपने प्रतियोगी इधर उधर भगा, स्वयं मजे करता है।